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कनुप्रिया (इतिहास – सेतु : मैं) December 3, 2005

Posted by Jaya in Dharmveer Bharti.
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नीचे की घाटी से
ऊपर के शिखरों पर
जिस को जाना था वह चला गया –
हाय मुझी पर पग रख
मेरी बाँहों से
इतिहास तुम्हें ले गया!

सुनो कनु, सुनो
क्या मैं सिर्फ एक सेतु थी तुम्हारे लिए
लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के
अलंघ्य अन्तराल में!

अब इन सूने शिखरों, मृत्यु-घाटियों में बने
सोने के पतले गुँथे तारों वालों पुल- सा
निर्जन
निरर्थक
काँपता-सा, यहाँ छूट गया – मेरा यह सेतु जिस्म

– जिस को जाना था वह चला गया

Comments»

1. shailaggarwal - August 31, 2006

i like this poem

2. kanishk - May 28, 2010

wah wah …kirpya http://www.divane.in join kar ke vahan par v aap apne divano ka maan bdayein

syed - December 2, 2014

superb poem this help me ……


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